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जननायक karpuri thakur biography in hindi bharat ratna 2024

karpuri thakur biography in hindi भारत सरकार द्वारा इस बार कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रतन देने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय उनकी 100वी जन्मजयंती पर लिया गया है। कर्पूरी ठाकुर (1924–1988) एक प्रमुख भारतीय राजनीतिज्ञ थे जिन्हें सामाजिक न्याय और समाज के असमर्थ वर्गों के सुधार के लिए दिए गए योगदान के लिए जाना जाता है। कर्पूरी जी एक महान फ्रीडम फाइटर भी थे जिन्होंने भारत छोडो आंदोलन में भाग लेने के लिए अपनी स्तानक की पढाई भी छोड़ दी थी। साथ ही उन्हें भारत की आजादी के आंदोलन में भाग लेने के लिए 26 महीने जेल में बिताने पड़े थे। कर्पूरी जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन पिछड़े वर्ग के उत्थान में लगा दिया। उनके इन्ही महँ कार्यो को देखते हुए लोगो ने उन्हें जननायक के ख़िताब ने नवाजा।

शुरुआती जीवन और शिक्षा

कर्पूरी ठाकुर ने अपने जीवन की शुरुआत बिहार के समस्तीपुर जिले के पितौंझिया गांव से किया । उनका मूल बैकग्राउंड समृद्धि से दूर था, और उनके शुरुआती जीवन आर्थिक कठिनाइयों से घिरा हुआ था। इन कठिनाइयों के बावजूद, ठाकुर एक कठिनाईपूर्ण छात्र थे जो उच्च शिक्षा की ओर बढ़ने में सफल रहे। जननायक जी की प्रारंभिक शिक्षा उनकी गांव से ही हुई। उसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यायल से मेट्रिक की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में पास किया।

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कर्पूरी जी का विवरण

नाम                                            कर्पूरी ठाकुर
उपनाम                                      जननायक
जन्मतिथि                                  24 जनवरी 1924
जन्मस्थान                                 समस्तीपुर , बिहार
शिक्षा                                        मेट्रिक
पेशा                                      राजनीतिज्ञ, शिक्षक, समाजसेवी
राजनितिक                           कार्यकाल 1952 से 1988
पहली विधान सभा सीट          ताजपुर
पार्टी                                     भारतीय क्रांति दल
सम्मान                                  भारत रतन 2024
निधन                                  17 फरवरी 1988
मृत्यु का कारण                    दिल का दोरा

क्या था कर्पूरी डिवीज़न

जिस समय जननायक जी ने शिक्षामंत्री पद का कार्यभार संभाला उस समय मेट्रिक की परीक्षा में अंग्रेजी में पास होना जरुरी था। और पत्राचार में भी अंग्रेजी भाषा का ही इस्तेमाल किया जाता था। परन्तु ठाकुर जी ने उस समय अंग्रेजी भाषा की कठिनाई को समझते हुए मेट्रिक की परीक्षा से अंग्रेजी को हटा दिया। जिससे विपक्षी दल के नेता कहने लगे क्युकी ठाकुर जी को अंग्रेजी नहीं आती इसलिए उन्होंने अंग्रेजी की अनिवार्ता को समाप्त कर दिया है। इसलिए उस समय जो भी मेट्रिक की परीक्षा पास करता उसे कर्पूरी डिवीज़न से पास होना बताया जाता था।

कर्पूरी जी की पत्नी का नाम | परिवार का विवरण

कर्पूरी जी की पत्नी का नाम फुलेश्वरी देवी है। जो एक गृहणी थी।

पुत्र                                           रामनाथ ठाकुर, बीरेंदर ठाकुर
पुत्री                                           एक नाम बताने में असमर्थ
पिता                                         गोकुल ठाकुर
माता                                        रामदुलारी देवी
जाति                                        नाइ
गांव                                         पितौंझिया, जिसे अब कर्पूरीग्राम के नाम से जाना जाता है
जिला                                        समस्तीपुर, बिहार

राजनीतिक करियर

ठाकुर ने स्वतंत्र भारत के प्रारंभिक वर्षों में राजनीति में कदम रखा। वह सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े और बाद में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी में शामिल होकर समाजवादी आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। ठाकुर जी ने अपना पहला चुनाव 1952 में ताजपुर विधानसभा सीट से लड़े और जीते भी। जननायक जी अपने 36 साल के चुनावी करियर सिर्फ के चुनाव (1984 ) हारे थे। बाकि वह जिस भी चुनाव में खड़े हुए जित ही हासिल की। वह 2 बार बिहार के मुख्य मंत्री ,एक बार बिहार के उपमुख्य मंत्री वह एक बार बिहार के शिक्षा मंत्री रहे। परन्तु वह किसी बार भी अपना कार्यकाल पूरा न कर सके।

पहला कार्यकाल (दिसम्बर 1970 – जून 1971): ठाकुर जी का पहला कार्यकाल सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को पता करने पर केंद्रित था। उन्होंने गरीब और समाज के किनारे के वर्गों की स्थिति में सुधार के लिए कई उपायों की शुरुआत की।

दूसरा कार्यकाल (दिसम्बर 1977 – अप्रैल 1979): मुख्यमंत्री के पद पर लौटकर, उन्होंने असमाजितों की उन्नति के लिए प्रयास जारी रखा, जिसमें सरकारी नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण नीतियों को लागू करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।

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आरक्षण नीतियाँ सामाजिक न्याय प्रवक्ता:
करपुरी ठाकुर, शायद, सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण को प्रस्तुत करने के लिए सर्वाधिक पहचाने जाते हैं। इस कदम को “करपुरी ठाकुर सूत्र” के रूप में जाना जाता है, जिसका उद्देश्य ऐतिहासिक रूप से असहाय समुदायों के लिए अवसर प्रदान करना था।अपनी राजनीतिक करियर के दौरान, ठाकुर हमेशा सामाजिक न्याय के प्रवक्ता रहे हैं। उन्होंने समाज के आर्थिक दुर्बल वर्गों को सशक्त बनाने के लिए प्रयासरत रहे और एक और समर्थ समाज की स्थापना के लिए काम किया।

मृत्यु:
करपुरी ठाकुर का निधन 17 फरवरी 1988 को हुआ। मुख्यमंत्री के रूप में उनके अल्पकालिक कार्यकाल के बावजूद, उनका बिहार की राजनीतिक परिदृश्य पर और सामाजिक कल्याण में योगदान को आज भी मान्यता मिल रही है।

करपुरी ठाकुर का जीवन और कार्य उन लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं जो भारत में सामाजिक समानता और न्याय के पक्षधरों का समर्थन करते हैं।

FAQ

Q-1 कर्पूरी ठाकुर कौन से कास्ट के थे?
कर्पूरी ठाकुर नाइ कास्ट से आते है।

Q -2 कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न क्यों मिला?
भारतीय राजनीती पर अपने कार्यो द्वारा अमिट छाप छोड़ने के कारण और पिछड़े वर्ग के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए ठाकुर जी को भारत रतन मिला है।

Q -3 कर्पूरी ठाकुर का जन्म कहाँ हुआ था?
कर्पूरी जी का जन्म बिहार प्रान्त के समस्तीपुर जिले के पितौंझिया गांव में हुआ

Q -4 कर्पूरी जी की पत्नी का नाम किया है
कर्पूरी जी की पत्नी का नाम फुलेश्वरी देवी है।

Q -5 कर्पूरी ठाकुर की मृत्यु कब हुई थी
17 फरवरी 1988 को दिल का दौरा पड़ने से कर्पूरी जी का निधन हो गया

Q -6 कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री कब बने
ठाकुर जी पहली बार (दिसम्बर 1970 – जून 1971) में और दूसरी बार (दिसम्बर 1977 – अप्रैल 1979) में मुखयमंत्री बने

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